मौलाना मदनी का बेबाक इंटरव्यू: RSS, मोदी, काशी-मथुरा विवाद पर रखी अपनी बात
"इस्लाम को नहीं, मुसलमानों को बदलाव की जरूरत."
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख महमूद मदनी ने द क्विंट के शादाब मोइज़ी के साथ बेबाक बातचीत में आरएसएस के साथ संबंधों से लेकर मुसलमानों के सामने आने वाली चुनौतियों, ज्ञानवापी-मथुरा विवाद और अपनी राजनीतिक भूमिका जैसे, हर मुद्दे पर खुलकर बात की. मदनी ने स्पष्ट किया कि आरएसएस से उनके मतभेद तो हैं, लेकिन वे बातचीत के खिलाफ नहीं हैं.
ज्ञानवापी, मथुरा जैसे मुद्दों पर मदनी ने कहा कि उन्हें इन मुद्दों पर बातचीत करने का अधिकार नहीं है, बल्कि उन कमेटियों को है जो केस लड़ रही हैं.
"मैं कौन होता हूं इस बारे में बात करने वाला? यह अधिकार मेरे पास नहीं है. हम सिर्फ यह कह सकते हैं कि उन लोगों को आपस में बात करनी चाहिए".
बातचीत के दौरान जब जिहाद का जिक्र आया तो महमूद मदनी ने इस शब्द के गलत इस्तेमाल पर अपनी नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने कहा,
“मैं मुसलमान हूं इसलिए अपने देश के लिए जान देना अपना फर्ज समझता हूं. मेरे लिए यह खुशकिस्मती की बात होगी. लेकिन जिहाद को लव के साथ जोड़ दिया, जिहाद को लैंड के साथ जोड़ दिया. इस्लाम की ताबीरात को जिस तरह जलील किया जा रहा है, उसकी मिसाल दुनिया में कहीं नहीं मिलती.”
जनाब, ऐसे कैसे के इस एपिसोड में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने RSS, इस्लाम, मुस्लिम पॉलिटिक्स और वक्फ पर अपनी राय रखी.
पूरा इंटरव्यू देखने के लिए यहां क्लिक करें.
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