रोज का डोज | 'गांव में न पानी है, न नौकरी': आदिवासी महिलाओं ने क्यों लौटाई मुफ्त में मिली साड़ियां?
"अगर आपने हमें नौकरी दी होती, तो हम ये साड़ियां खुद खरीद पाते."
ग्राउंड रिपोर्ट
'गांव में न पानी है, न नौकरी': आदिवासी महिलाओं ने क्यों लौटाई मुफ्त में मिली साड़ियां?
"अगर आपने हमें नौकरी दी होती, तो हम ये साड़ियां खुद खरीद पाते. मोदी सरकार हमें साड़ी देने वाली कौन होती है? आपको लगता है कि हम अपने कपड़े नहीं खरीद सकते? हम इनसे अच्छी साड़ियां खरीदेंगे. हमें काम चाहिए, हम मेहनती हैं. हम घर पर नहीं बैठे हैं."
यह कहना है महाराष्ट्र के पालघर के एक आदिवासी गांव वसंतवाड़ी की स्थानीय निवासी लाडकुबाई (52) का.
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