बिहार में 'वोटर घोटाला'?
पत्रकार अजीत अंजुम के खिलाफ FIR के पीछे कहानी क्या है?
बिहार में इन दिनों चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी वोटर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया चल रही है. इस प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर रिपोर्टिंग कर रहे वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम पर बिहार के बेगूसराय में FIR दर्ज की गई है. उनपर सरकारी काम में बाधा डालने और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने जैसे आरोप लगाए गए हैं.
FIR के बाद अजीत अंजुम ने द क्विंट से बातचीत की. उन्होंने कहा कि उनकी रिपोर्टिंग से प्रशासन में जो बेचैनी हुई, उसी का नतीजा यह FIR है. उन्होंने इसे अपनी पत्रकारिता को दबाने की कोशिश बताया.
अजीत अंजुम पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का भी आरोप लगा है. कहा गया कि उनका फोकस मुस्लिम मतदाताओं पर था. इस आरोप के जवाब में उन्होंने कहा:
यह आरोप बिल्कुल बेबुनियाद है. एक पत्रकार जब फील्ड में जाता है तो वह जनसंख्या की संरचना (डेमोग्राफी) के बारे में पूछ सकता है. मैंने सिर्फ इतना पूछा था कि आपके बूथ पर कितने हिंदू और कितने मुस्लिम वोटर हैं — इसमें गलत क्या है?
‘जनाब ऐसे कैसे’ के इस एपिसोड में देखिए पत्रकार अजीत अंजुम के साथ खास बातचीत. बिहार में चल रहे वोटर लिस्ट रिवीजन, कथित फर्जीवाड़े, 'यूट्यूबर' कहे जाने, 'पैराशूट पत्रकारिता' जैसे आरोपों पर उन्होंने क्या कहा?
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