"न शेल्टर, न योजना": दिल्ली में आवारा कुत्ते अदालती आदेश और हकीकत के बीच फंसे
2024 में देशभर में 37 लाख से ज्यादा डॉग-बाइट के केस
ये बोला दिल्ली के कुत्ते से गांव का कुत्ता
कहां से सीखी अदा तू ने दुम दबाने की
वो बोला दुम के दबाने को बुज़-दिली न समझ
जगह कहां है यहां दुम तलक हिलाने की"
सागर खय्यामी का ये शेर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले की कहानी बयां करता है. शीर्ष अदालत ने दिल्ली-NCR की सरकारों को आठ सप्ताह के भीतर आवारा कुत्तों को शेल्टर में रखने के निर्देश दिए हैं.
दिल्ली-NCR में डॉग बाइट और रेबीज से होने वाली मौतों के बढ़ते आंकड़ों पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था. कोर्ट के फैसले का उद्देश्य मानव जीवन की रक्षा करना है, लेकिन कुछ सवाल भी हैं: बिना किसी बुनियादी ढांचे के, दिल्ली के हर इलाके से आवारा कुत्तों को सिर्फ छह से आठ हफ्तों में शेल्टर में कैसे रखा जा सकता है? और अगर यह समय सीमा पूरी नहीं हो पाई तो क्या होगा?
जनाब, ऐसे कैसे के इस एपिसोड में हम इसी मुद्दे पर बात करेंगे. दिखाएंगे आपको, दिल्ली-NCR में डॉग शेल्टर की जमीनी हकीकत और बताएंगे लोगों का कोर्ट के फैसले पर क्या कहना है.
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