उत्तर प्रदेश बिजली संकट
सरकारी वादे और जमीनी हकीकत में कितना अंतर?
भीषण गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश में बिजली कटौती से लोगों के पसीने छूट रहे है. लगातार बिजली कटने से जनता बेहाल है. प्रदेश में बिजली संकट ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.
बिजनौर जिला अस्पताल में बिजली कटौती और जनरेटर में डीजल की कमी के कारण 26 वर्षीय मरीज का डायलिसिस रुक गया, जिससे उसकी मौत हो गई.
ग्रेटर नोएडा के मकनपुर खादर गांव में ट्रांसफॉर्मर खराब होने की वजह से 40 दिनों तक बिजली नहीं रही. जिसकी वजह से लोगों को बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ा.
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से लेकर इटावा, मैनपुरी, लखनऊ, लखीमपुर खीरी तक के लोग बिजली कटौती की समस्या से परेशान हैं. कई जगहों पर लोगों का आरोप है कि दिन में 10-10 बार बिजली कट रही है.
'जनाब ऐसे कैसे' के इस एपिसोड में हमने उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था की जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की. साथ ही सरकार के वादों की भी पड़ताल की. पूरी रिपोर्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें.
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₹10 की चड्डी से लेकर 10 लाख रुपए का सूट तक का सफर असली विकास और अच्छे दिन तो बस उनके आए है। जनता 5 kg राशन में खुश है और भगत गोबर और मूत्र में।🤣🤣🤣